इक तरफ माँ है मेरी लिरिक्स (निखार जुनेजा)

इक तरफ माँ है मेरी 

लिरिक्स (निखार जुनेजा)

इक तरफ माँ है मेरी लिरिक्स (निखार जुनेजा)
इक तरफ माँ है मेरी लिरिक्स (निखार जुनेजा)

Song - Ik Taraf Maa Hai Meri
Vocals - Nikhar Juneja
Music Produced - Nikhar Juneja

इक तरफ माँ है मेरी 

लिरिक्स (निखार जुनेजा)

इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार
इक तरफ लोभ
इक तरफ भोग
इक तरफ माया का भंडार
इक तरफ माता जगत जननी
मेरी माँ दुर्गा का दरबार
इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार

इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार...

कैसे कैसे ये दुष्टों से माँ पाला पड़ा
कल तक था जो मेरा
वो मेरे सामने खड़ा

कैसे कैसे ये दुष्टों से माँ पाला पड़ा
कल तक था जो मेरा
वो मेरे सामने खड़ा
तेरे हवन की अग्नि में माँ जलता रहूँ
कितना भी ये गिरा दें माँ मैं चलता रहूँ
मेरी मैय्या के आसरे मैं चलता रहूँ
इक तरफ दौलत शोहरत
दौड़ता हर लाचार
इक तरफ आरती है
और माँ का श्रृंगार
इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार

दुनियादारी के सारे बंधन तोड़ूंगा मैं
माँ बाघेश्वरी का दर ना छोड़ूंगा मैं
तेरे मंदिर के सामने माँ बैठा रहूँ
आते जाते हुए हर प्राणी की सेवा करूँ
हर इक प्यासे पंथी को पानी देता रहूँ
इक पीड़ा शोषण
भूख और निर आहार
उस तरफ सबकी सेवा
जिस तरफ तेरा निखार
इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार
इक तरफ लोभ
इक तरफ भोग
इक तरफ माया का भंडार
इक तरफ माता जगत जननी
मेरी माँ दुर्गा का दरबार
इक तरफ माँ है मेरी
इक तरफ ये संसार
इक तरफ कष्ट है मेरे
इक तरफ माँ का प्यार...

एक बेटा तेरा बोले माँ
एक बेटा बोल न सकता
एक के हाथो हथियार है माँ
एक निर्बल और निहत्था
एक बेटे ने जयकार किए
एक बेटा बस चिल्लाया
तेरे दर पर ही एक बेटे ने
दूजे का शीश चढ़ाया
जो खून लहू से लाल हो
कैसा ममता का दर है
जहाँ भक्ति भी बर्बरता हो
कट जाते कितने सर है
मैया तेरा भक्त है कौन बड़ा
कौन अपना कौन पराया
जिसने सर क्षण में काट दिया
या जिसने सर है कटाया
तेरे खुले केश और रक्त नयन
कर में खप्पर मुंडमाल भयंकर
काल चरम पर ताल परम पर
छील चरम सर करदे कलम और
कालरात्रि काल करो
श्मशानवासिनी नाश करो
निर्बल का रक्त बहाएं जो
उनके ही रक्त का पान करो

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।

भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥1॥
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते.....

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