हे माधव हिंदी लिरिक्स (नारसी)
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हे माधव हिंदी लिरिक्स (नारसी) |
Song: Hey Mahdhav
Rap: Narci
Singer: Late Shri Rajeshwaranand Ji Maharaj
Lyrics: Late Shri Rajeshwaranand Ji Maharaj & Narci
Music: Narci
हे माधव हिंदी लिरिक्स (नारसी)
माधव, माधव, माधव
प्रभु, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि क्या गलत हो रहा है?
मैं, ये मेरा स्वभाव, ये मेरा वक़्त, प्रभु।
क्या गलत चल रहा है?
[राजेश्वरानंद जी महाराज]
पतितों के तारने के किस्से बड़े पुराने,
पतितों के तारने के किस्से बड़े पुराने
क्या इक नई कहानी तैयार अब न होगी?
क्या इक नई कहानी तैयार अब न होगी?
हे नाथ, क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी?
हे नाथ, क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी?
[नार्सी]
शुरू करो अब नई कहानी, यही मैं माँगूँगा प्रभु के आगे,
जहाँ पे न हों झूठी उम्मीदें, झूठे सहारे, झूठे से वादे।
झूठे ख़याल, झूठी कसम, झूठी सी बातें और झूठे दिलासे,
जहाँ न कोई गीतों को मेरे बिना वजह झूठा बता दे।
जहाँ पे मेरी कला को कोई थोड़े ही पल अपना बना ले।
जहाँ पे कोई फिर से यक़ीन मुझे ज़रा सा करना सिखा दे।
फिर से वो अक्षर प्रेम के ढाई, मुझे ज़रा सा पढ़ना सिखा दे,
फिर से कोई मुझे मेरी कमी से सही तरह लड़ना सिखा दे।
जहाँ मिले न फिर वो सबक, चोटों पे कोई न फेंके नमक
जहाँ कटे न फिर से हलक, फिर से न जाए लहू टपक।
न फिर से हो छल, न फिर से कपट, फिर से न प्राणी ये जाए भटक,
फिर से न जपते राधा का नाम, नैनों से जाए आँसू छलक।
फिर से तू कर दे हल्का ये मन, फिर न दिखाना तू झूठे स्वप्न,
प्रभु हँसा दे न थोड़े ही क्षण, थोड़े ही क्षण रखो हाँ मन।
फिर से हटा दे ये दिल की चुभन, दर्दों से खींचो ये मेरा बदन,
बैठा अकेला मैं मेरे सदन, कानों को छूते हैं हरि-भजन।
फिर से न देना तू यहाँ जन्म, फिर से न देना हाथों में कलम,
फिर से बनाना न मुझे अधम, फिर से न करना कहानी ख़त्म।
फिर से न देना तू भारी रकम, फिर से न देना तू दिल पे ज़ख्म,
फिर से देना तू कोई भी मित्र, कोई कुटुंब या कोई सनम।
फिर से न देना तू यहाँ जन्म, यदि दिया जन्म न करना जटिल,
देना तू काया, पर देना न दिल, दिया जो दिल तो देना न छिल।
गया जो छिल यदि दिल ये मनहूस, तो पीड़ा को करूँ न थोड़ा महसूस,
इतना ही करना बस तू प्रभु, करूँ न अब भी पीड़ा महसूस।
[समापन से पूर्व- pre-outro]
एक सवाल तो आपसे बनता है ना माधव,
क्योंकि संचालक तो स्वयं आप हैं महाराज
ओ माधव।
[राजेश्वरानंद जी महाराज]
क्या इक नई कहानी तैयार अब न होगी?
हे नाथ, क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी?
हे नाथ, क्या ये विनती स्वीकार अब न होगी?
[समापन- Outro]
प्रभु, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि क्या गलत हो रहा है?
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