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Maneesh
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पर्वत उठाओ ना लिरिक्स
(निखर जुनैजा)
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पर्वत उठाओ ना लिरिक्स (निखर जुनैजा) |
Song - Parwat Uthao Na
Singer - Nikhar Juneja
Composer - Nikhar Juneja
Lyrics - Nikhar Juneja
पर्वत उठाओ ना लिरिक्स
(निखर जुनैजा)
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
लीला करो ना मोहन
माखन चुराओ ना
तेरा गांव सूना है
अब तो लौट आओ ना
तेरी बंसी सुनने को
अब गईया तरस रही
और गोपियां भी कह रही
वापस रे जाओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
तेरी राह देख
कुंज की गलियां तरस रही
आ जाओ श्याम
घर को अब लौट आओ ना
जैसे बिरज पे संकट
घनघोर छाया था
मेघों ने शोर
घन घन गर्जन मचाया था
जैसे बिरज पे संकट
घनघोर छाया था
मेघों ने शोर
घन घन गर्जन मचाया था
नंदलाल ने
दिवेंद्र का अहम मिटाया था
जो कनिष्ठ का पे
कृष्ण ने गिरिवर उठाया था
मुझ पर भी श्याम
संकट के मेघ छा रहे
तेरी आस में
मैं भीगता जल्दी से आओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
तेरी राह देख
कुंज की गलियां तरस रही
आ जाओ श्याम
घर को अब लौट आओ ना
यमुना में कालनाग ने
गरल मिलाया था
बृजधाम सारा
प्यासा जल अकाल छाया था
यमुना में कालनाग ने
गरल मिलाया था
बृजधाम सारा
प्यासा जल अकाल छाया था
जल को बनाने निर्मल
गोपाल आया था
और कालिया के फन पर
नर तन दिखाया था
मेरी भी जिंदगी में
श्याम विष है घुल गया
मेरे भी दुख के सर पर
नर तन दिखाओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
तेरी राह देख
कुंज की गलियां तरस रही
आ जाओ श्याम
घर को अब लौट आओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
हे श्याम मुरली वाले
ओ.. ओ... ओ.... ओ.....
ओ.. ओ... ओ.... ओ.....
तुम मत्स्य बने माधव
जल प्रलय से निकाला
अमृत के लिए
कुर्म बन के मंथन कर डाला
वराह ने मारा
हिरण्याक्ष पृथ्वी को संभाला
नरसिंह बन के
हिरण्यकशिपु को चीर डाला
तुम वामन हो माधव
त्रिलोकी को नापो
तुम योद्धा हो परशुराम
शत्रु को मिटा दो
तुम रघुवर हो राम हो
रावण को मारो
श्री कृष्ण बन के
दुराचारी कंस को संहारो
तुम कलकी बन के आओ
प्रभु काल को संवारो
एक चक्र फेंको
सुदर्शन को कष्ट से उबारो
इस युग में सब असुर है
चौतरफा विध्वंस है
अपनों का मांस नोचते
अब घर घर में कंस है
कब आओगे गिरधारी
मुरारी ओ बनवारी
कितनी सदियां बीत गई
आस में तुम्हारी
जिस गैया को कन्हैया
माता कहा था तुमने
उस माता को ही काटा
कलियुग में आज जन ने
लीला करो ना मोहन
माखन चुराओ ना
तेरा गांव सूना है
अब तो लौट आओ ना
तेरी बंसी सुनने को
अब गईया तरस रही
और गोपियां भी कह रही
वापस रे जाओ ना
हे श्याम मुरली वाले
मुरली बजाओ ना
एक बार फिर गोवर्धन पर्वत उठाओ ना
तेरी राह देख
कुंज की गलियां तरस रही
आ जाओ श्याम
घर को अब लौट आओ ना
आ जाओ श्याम
घर को अब लौट आओ ना...
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