चले बाराती भोलेनाथ की शादी लिरिक्स (हंसराज रघुवंशी)

चले बाराती भोलेनाथ की शादी

लिरिक्स (हंसराज रघुवंशी)

चले बाराती भोलेनाथ की शादी लिरिक्स (हंसराज रघुवंशी)
चले बाराती भोलेनाथ की शादी लिरिक्स (हंसराज रघुवंशी)

Song: Chale Baraati Bholenath Ki Shaadi
Singer : Hansraj Raghuwanshi
Project By: Komal Saklani
Lyrics: Kabeer Shukla
Music & Composer : Dj Strings

चले बाराती भोलेनाथ की शादी

लिरिक्स (हंसराज रघुवंशी)

चले बाराती, चले बाराती
चले बाराती, चले बाराती
चले बाराती, बाराती चले बाराती
चले बाराती, बाराती चले बाराती

माथे ऊपर तिलक लगा के, तन पे भस्म रमा ली
भाल चंद्रमा गंग शीश और गल में बसंग सजा ली
माथे ऊपर तिलक लगा के तन पे भस्म रमा ली
भाल चंद्रमा गंग शीश और गल में भुजंग सजा ली

भूत प्रेत सब नाचन लागे, भांग सभी को पिला दी
मार मार के खुशी से ताळी, आधी दुनिया हिला दी
तीन लोक के राजा शिवजी, करने चले है शादी
चले बाराती चले बाराती, भोलेनाथ की शादी
तीन लोक के राजा शिवजी, करने चले है शादी
चले बाराती चले बाराती भोलेनाथ की शादी
चले बाराती, चले बाराती
चले बाराती, चले बाराती

ओम मंगलम भगवान् विष्णु मंगलम गरुणध्वजः
मङ्गलम् पुण्डरीकाक्षः मङ्गलाय तनो हरि
मङ्गलाय तनो हरि, मङ्गलाय तनो हरि..

भोलेनाथ ने भस्म उड़ा के...
भोलेनाथ ने भस्म उड़ा के मस्ती अलग फैला दी
संगी बृंगी संग में नंदी नाचे देव फौलादी
ऐसी लहर की गली गली में आ गई जैसे आंधी
चांद सितारे पर्वत नदिया झूमी हर ईक वादी
देवादि महादेव के डमरू, थाप से दुनिया हिला दी

तीन लोक के राजा शिवजी करने चले है शादी
चले बाराती चले बाराती भोलेनाथ की शादी
तीन लोक के राजा शिवजी करने चले हैं शादी
चले बाराती चले बाराती भोलेनाथ की शादी

चले बाराती चले बाराती
चले बाराती, बाराती चले बाराती

ऐसी रात ना फिर से होगी आदि शक्ति की शादी
योगीराज शंकर ने अपनी छोड़ दी आज समाधि
ऐसी रात ना फिर से होगी आदि शक्ति की शादी
योगीराज शंकर ने अपनी छोड़ दी आज समाधि

गृहस्त जीवन में जीने जा रहे गौरा संग अनादी
बड़ी सरलता से जीवन में प्यार की रीत सिखा दी
पूरन कर दिया पार्वती को प्रेम की डोरी बांधी

तीन लोक के राजा शिवजी करने चले हैं शादी
चले बाराती चले बाराती भोलेनाथ की शादी
तीन लोक के राजा शिव जी करने चले शादी
चले बाराती चले बाराती भोलेनाथ की शादी

चले बाराती चले बाराती...
ओम मंगलम भगवान् विष्णु मंगलम गरुणध्वजः
मङ्गलम् पुण्डरीकाक्षः मङ्गलाय तनो हरि
मङ्गलाय तनो हरि, मङ्गलाय तनो हरि.....

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