कैलाशपति रैप लिरिक्स (राँझा)

कैलाशपति रैप लिरिक्स (राँझा)

कैलाशपति रैप लिरिक्स (राँझा)
कैलाशपति रैप लिरिक्स (राँझा)

Song :- Kailashpati
Lyrics & Composition :- Raanjha
Rap :- Raanjha
Singing :- Lucky Kumar
Vocals :- Premanand Ji Maharaj
Music :- Smokey

कैलाशपति रैप लिरिक्स (राँझा)

भगवान शिव जो हैं
उनके जैसा कोई त्रिभुवन में नहीं
वासुकी नाग का यज्ञोपवित पहने हुए हैं
भयंकर फनधारी, विषधार उनकी माला है
और गंगा जी जटाओं में हैं
अरे शिव की क्षमता कोई कर सकता हैं
शिव तो शिव है , वो तो महादेव है
देवादिदेव महादेव है...

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

अनादि है अनंत, महादेव महादेव है वो
सृष्टि का आरम्भ, महादेव महादेव है वो
योगियों में योगी ध्यान मगन महादेव
त्रिनेत्र धारी प्रलय की लय है महादेव

तेरे क्रोध का प्रकोप कोई सह न पाए यहाँ
कोई दूसरा प्रलयकारी न तेरे जैसा हुआ
त्रिनेत्र धारी के त्रिनेत्र खुले तो
प्रचंड भूचाल में समा जाए धरा

काँपे देवता भी असुर तेरे आगे नहीं बोले
धरा डग मग तेरी एक दृष्टि से डोले
किसमें है साहस जो ललकार सके तुझे
कोई भूल करे प्यारा यमराज को वो होले

तेरे कद की तो भोले कोई सीमा ही नहीं
तेरा अंत और आरम्भ कभी मिला ही नहीं
स्वयं ब्रह्मा और विष्णु भी नमन करें तुझे
और दूजे किसी की भी ऐसी महिमा नहीं है

हाँ रावण पूजे तुझे और राम भी पूजे
और महाभारत के वो नायक घनश्याम भी पूजे
तुझे पूजे बड़े बड़े असुर दैत्य भी पूजे
उन असुरो के काल हनुमान भी पूजे

हाँ यूँही नहीं तुझे देव आदिदेव कहता जग
जीवन मृत्यु के चक्र से रहता तू अलग
तू तो काल का भी काल महाकाल विकराल
तू ही जाति है सारे धर्म और मजहब

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

प धा प म ग म प धा नि धा नि सा नि धा
प म ग म प धा प म ग म प
म ग म ग रे सा रे ग म प प प प धा प धा
ग म ग म ग म ग रे रे रे रे रे रे
सा रे ग म प धा प धा प..

सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग
हर युग में तेरे ही भक्त सबसे निडर
कोई भक्त तेरा ही जो ऐसा साहस कर सके
जो उठाके कैलाश रखे अपने सिर पर

जिसके सिर पर हाथ तेरा उसको क्या होगा
मेरा भोला शंकर तभी सबसे अनोखा
जिसके भक्तों का साहस ही सरल नहीं
वो जटाधारी कितना विलक्षण होगा

न कोई तेरे शिव गंगा को धारण कर पाता
न कोई देव दूजा कंठ में विष रख पाता
मेरे शिव का सामर्थ्य विचारों से परे है
तभी देवों का तू देव महादेव कहलाता

विचार से तेरे मन के विकार कट जाते
गर जान ले तुझे तो अहंकार मिट जाते हैं
गर साथ मेरे शंभू करलु सामना दुनिया का
उसे चाहिए क्या जिसे महाकाल मिल जाते हैं

सिर कहीं न झुके वो तेरे आगे झुक जाता है
कहीं हाथ न फैला जो तेरे आगे जुड़ जाता है
मुझे भय वय नहीं मृत्यु का भोले नाथ
तेरा नाम देख के तो खुद काल मुड़ जाता है

हर कण में बसा है भोले जानता हूँ मैं
तू मेरे मन में रमा है पहचानता हूँ मैं
मुझे परवाह न दुनिया के मान सम्मान की
तेरे चरणों में थोड़ी जगह माँगता हूँ मैं

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम्
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्

शिवा शंकर शिवा शिवा
शिवा शंकर शिवा शिवा
शिवा.....

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