कर्मा हिंदी लिरिक्स
(कान्तारा-1)
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| कर्मा हिंदी लिरिक्स (कान्तारा 1) |
Song Credits:
Singer Name: Venkatesh DC
Music Director: B. Ajaneesh Loknath
Lyricist: Juno
कर्मा हिंदी लिरिक्स (कान्तारा 1)
कर्म की कोख ही
जनम का द्वार है
यही संसार का सार है
सुख की ना ये धारा
ये मंझधार है
यही संसार का सार है
करनी की गागर का खेल कैसा
के पाप धुले, पश्चताप ना धुले
हे... हा... हे... ओ...
हे... ना...
आरे... आरो... नेना... नीनु...
रे... ना...
देह की, चादर, साफ करे
और कालिख तू मन की ढकता है रे
नैनों को, मूंद के, पाप करे
पर खुले नैन भगवन रखता है रे
कभी कोई मृग, लुभाए कभी चंदन
कर्ता फिरे तू, परछाइयों से दंगल
हवन में चाहे तू लाख जलाए
दुखियारों के मन का वो श्राप ना जले
हे... हा... हे... ओ...
हे... ना...
आरे... आरो... नेना... नीनु...
रे... ना...
जिस पल, वो तेरा, जनम लिखे
उस पल ही वो अंतिम घड़ियाँ लिखे
खेल ये, जो कोई, भांप गया,
उसको ही वो उजला ज़रिया दिखे
जीवन ये तेरा, दुख भरा कोई बंधन
मरन भला है, तन जले जैसे चंदन
दुख के सागर का खेल ऐसा
के आंसू टले, पर विलाप न टले
हे... हा... हे... ओ...
हे... ना...
आरे... आरो... नेना... नीनु...
रे... ना...
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