अंतिम उपदेश लिरिक्स
बंदे किस पर करे गुमान- नारसी
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| अंतिम उपदेश लिरिक्स | बंदे किस पर करे गुमान - नारसी |
Song: Antim Updesh (Bande Kis Par Kare Guman)
Singer: Mohammed Rafi
Rap: Narci
Music: Narci
Lyrics: Pandit Shivram,
Pandit Ramchandra Bagora & Narci
अंतिम उपदेश लिरिक्स
बंदे किस पर करे गुमान - नारसी
[मोहम्मद रफी]
ये दुनिया है छाल का सपना
सभी हैं पराए, इक प्रभु नाम अपना
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दो दिन का मेहमान
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दिन का मेहमान
बंदे
[नारसी]
योग्य शिष्य के भांती आगे बैठे हो तुम रामानुज
मृत्यु शैया पे लेता, मैं देता हूँ तुम्हें बातें कुछ
बातें सीखी अनुभव से जो जिए हैं मैंने खुद
करता हूँ मैं शुरू सुनो बस जाना, बन श्रोता तुम
अहंकार हो सत्ता का, या भक्ति का या शक्ति का
सुंदरता का, प्रतिष्ठा या तेरी संपत्ति का
अहंकार ही नष्ट करेगा जीवन सारा व्यक्ति का
अहंकार ही कारण बनता भ्रांति की उत्पत्ति का
ज्ञान का रखा अहंकार था, हुई मेरी यह तभी दशा
अहंकार के चलते मेरे पापी तन पे बाण लगा
ज्ञान का रख के अहंकार न देख, लखन मैं पाया था कि
श्री राम को पूरा ही था अहंकार का ज्ञान पता
इतना ही अंतर बैठा हम दोनों के दरमियान
रावण तो विद्वान है ठहरा, राम तुम्हारे विद्यावान
रावण के तो अहंकार ने अपनों को भी शत्रु माना
विनय राम का पर देता है शत्रु को भी दिल में स्थान
ज्ञानी होकर भी न रोका अहंकार के भाव को
समय हाँ रहते न भर पाया अहंकार के घाव को
दिल में रख के भय को प्राणी मेरे आगे झुकते थे
राम के आगे झुकते हैं पर दिल में रख के भाव को
स्वयं से योग्य रखना शत्रु, यदि वैर को बांधेगा
कौन तेरा है शत्रु, यह देख जगत भी आँकेगा
शत्रु ही न होता जो तो कैसे सक्षम होते हम
शत्रु ही तो सिमित घेरे से तुझको निकालेगा
[मोहम्मद रफी]
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दो दिन का मेहमान
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दिन का मेहमान
बंदे
[नारसी]
रख के दिल में कामना जो शंभू को पुकारेगा
महादेव वो दे देंगे जो दिल तेरा बस चाहेगा
रख के दिल में भावना पर शंभू को पुकारेगा
तो महादेव वो दे देंगे जो दिल शंभू का चाहेगा
अंतर इन दो बातों में यदि सही तरह से झांकेंगे
तभी भाव को सही तरह से दिल से हम पहचानेंगे
जिनके दिल में लालसा वो महादेव से मांगेंगे
जिनके दिल में भावना वो महादेव को मांगेंगे
मृत्यु के जो पास खड़ा हूं, असुर मेरा ही कारण है
प्रकृति से योगी हूं, तभी रूप गुरु का धारण है
ज्ञान तुम्हें जो दे रहा है ये कर सकते थे राम तुम्हें
पर देखा मौका मुझको, वह चाहते मेरा तारण है
लक्ष्मण- क्या नाम, थोड़ा भी अंदाज़ा है?
मन रहे जो लक्ष्य पे, क्या सुंदर ये परिभाषा है
श्री राम है लक्ष्य तुम्हारे, फिर कहे की बाधा है
दिल में जो समा जाते हैं, वो नर तुम्हारे भ्राता हैं
व्यक्ति तो कहानी है और स्वामी ही सृजेता है
राम नाम जो हासिल है तो समझो दिल विजेता है
राम नाम का जादू, प्राणी, मुक्ति दिल को देता है
श्री राम के बिना अधूरा सारा ही ये त्रेता है
चलता हूँ मैं, विदा करो, समय हुआ मेरे जाने का
समय हुआ है श्री हरि के चरणों में समाने का
हे भानु कुलभूषण, याद रहे मेरी बातें ये
राम नाम ही मौका है खुद का राम जगाने का
[मोहम्मद रफी]
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
अंत समय पछताएगा जब निकलेंगे रे प्राण
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दो दिन का मेहमान
बंदे किस पर करे गुमान
बंदे किस पर करे गुमान
किस पर करे गुमान
तू है दिन का मेहमान
सभी हैं पराए एक प्रभु नाम अपना...
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